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कई साईं भक्तों का ये भी कहना है की बाबा ने कभी भी स्वयं को भगवान नही कहा, तो आईये उनके मतिभ्रम का भी समाधान करते है :-

इसी पहलवानी के तहत वे एक बार पिटे भी गये :-

साईं का सबसे प्रसिद्ध वाक्य है “अल्लाह मालिक है” इसलिए साईं के हिंदू न होने के बहुत से प्रमाण होते हुए भी कुछ साईं भक्त इसे या ये कहते है को वो इसे संत मानते है या फिर कहते है की वे सिर्फ थोडा बहुत इसे मानते है

साईं भक्तों बाबा ने अपने मुह से कभी अपने जन्म,माँ,बाप और अपने गुरु के बारे में नहीं कहा,तो यह झूठी कहानियां किसलिए सिर्फ बाबा के नाम पर पैसे बटोरने के लिए.आँखें खोलो और साजिश को समझो.

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बारात के साथ किस प्रकार आये इसका वर्णन निम्न प्रकार से है :–

कई साँईभक्त अंधश्रध्दा मेँ डूबकर कहते हैँ कि साँई न तो हिन्दू थे और न ही मुस्लिम। इसके लिए अगर उनके जीवन चरित्र का प्रमाण देँ तो दुराग्रह वश उसके भक्त कुतर्कोँ की झड़ियाँ लगा देते हैँ।

इन घड़ों द्वारा बाबा स्वयं ही पोधों में पानी डाला करते !

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मेरे मतानुसार श्री कृष्ण जानते थे की कलियुग में मनुष्य मतिभ्रमित हो कर मुर्दों को पूजेंगे इसीलिए उन्होंने अर्जुन को ये उपदेश दिया अन्यथा गीता कहते समय वे युद्ध भूमि में थे और युद्ध भूमि में ऐसा उपदेश देने का क्या अभिप्राय ?

जब भगवान अवतार लेते है तो सम्पूर्ण पृथ्वी उनके यश से उनकी गाथाओ से अलंकृत हो जाती है… उनके जीवनकाल मे ही उनका यश शिखर पर होता है….परन्तु !!

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